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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में योनी में दरà¥à¤¦ (पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन)
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होना सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• है। जहां à¤à¤• तरफ कई तरह के हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स के सà¥à¤¤à¤° में परिवरà¥à¤¤à¤¨ आता है, वहीं समय के साथ-साथ गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠका आकार à¤à¥€ बढ़ता रहता है। हालांकि, ये सà¤à¥€ बदलाव सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शिशॠके जनà¥à¤® के लिठजरूरी हैं, लेकिन कà¥à¤› परिवरà¥à¤¤à¤¨ à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ होते हैं, जो पीड़ादायक होते हैं। पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन यानी शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ में होने वाला दरà¥à¤¦ à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में से à¤à¤• है। आंकड़ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° करीब 80 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ महिलाओं को इस पीड़ा का सामना करना पड़ता है (1)।
रोणि कà¥à¤¯à¤¾ होती है और यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में कैसे बदलती है?
शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ शरीर के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में पेट और पैरों के बीच सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होती है। यहां दोनों कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होती हैं। दाà¤à¤‚ और बाà¤à¤‚ तरफ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ ये दोनों हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ मिलकर शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ के à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¥‡ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करती हैं, जिसे पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² कहा जाता है। ये पीछे सैकà¥à¤°à¤® बोन से और आगे सिमà¥à¤«à¤¿à¤¸à¤¿à¤¸ पà¥à¤¯à¥‚बिस नामक मजबूत जोड़ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती हैं। यह जगह आंतों, मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ व पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है। लिगामेंट का मजबूत नेटवरà¥à¤• इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ घेरकर रखता है, जिस कारण ये सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहते हैं (2)।
वहीं, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के समय शरीर में रिलैकà¥à¤¸à¤¿à¤¨ नामक हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होता है। यह शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ à¤à¤¾à¤— के लिगामेंट को शिथिल बना देता है, ताकि उनमें आसानी से खिंचाव हो सके। इससे शिशॠको बाहर आने में आसानी होती है। यही कारण है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के समय और डिलीवरी के बाद शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के अधिकतर à¤à¤¾à¤— हिलते रहते हैं (3)।
आइà¤, अब जानते हैं कि पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन किसे कहते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ होता है पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन (पीजीपी)?
यह दरà¥à¤¦ शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ के आगे के à¤à¤¾à¤— से लेकर पिछले à¤à¤¾à¤— में हो सकता है। साथ ही यह कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚, कमर, पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡, जांघों और योनी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में हो सकता है। यह दरà¥à¤¦ हलà¥à¤•ा या तेज किसी à¤à¥€ तरह का हो सकता है। इससे चलना-फिरना और रोजमरà¥à¤°à¤¾ के काम करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है। यह दरà¥à¤¦ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान या फिर डिलीवरी से दो-चार हफà¥à¤¤à¥‡ पहले शिशॠके पेलà¥à¤µà¤¿à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आ जाने से होता है। कà¥à¤› मामलों में यह डिलीवरी के बाद à¤à¥€ रहता है (4)।
आगे पढ़िठकि कब होता है पीजीपी।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में पीजीपी कब विकसित होता है?
अमूमन यह दरà¥à¤¦ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ (पहली तिमाही) में या फिर डिलीवरी से कà¥à¤› दिन पहले महसूस होता है।
इसके अलावा, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की तीसरी तिमाही में जब शिशॠका सिर पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की ओर हो जाता है, तब à¤à¥€ यह दरà¥à¤¦ होता है।
यह दरà¥à¤¦ डिलीवरी के बाद à¤à¥€ रह सकता है (5)।
अगर आपको पहली गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में यह दरà¥à¤¦ रहा है, तो दूसरी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान à¤à¥€ यह दरà¥à¤¦ होने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, अगर आपने पहली बार में इसका उपचार ठीक तरह से करवाया था, तो दूसरी बार में यह दरà¥à¤¦ सहनीय होगा।
लेख के इस à¤à¤¾à¤— में हम योनी में दरà¥à¤¦ के कारणों के बारे में जानेंगे।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में योनी में दरà¥à¤¦ होने के कारण?
पीजीपी का पहला और सबसे अहम कारण à¤à¥à¤°à¥‚ण की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ नीचे यानी पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में होना है। वहीं, जब शिशॠका आकार बढ़ता है, तो उसका दबाव पेलà¥à¤µà¤¿à¤• हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, जोड़ों और लिगामेंट पर पड़ता है। इससे गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को चलने-फिरने और अपनी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ को ठीक तरह से नियमित रखने में दिकà¥à¤•त होती है। इसके अलावा, अनà¥à¤¯ कारण à¤à¥€ हैं, जिनके चलते योनी में दरà¥à¤¦ होता है (6) (7) :
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• जोड़ों की कारà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ में असमानता आने पर।
à¤à¤• पेलà¥à¤µà¤¿à¤• जोड़ के असामानà¥à¤¯ रूप से काम करने पर दूसरे पर दबाव पड़ना।
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला का वजन अधिक होने पर।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान शरीर में विकसित होने वाले हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स के कारण कनेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ टिशू का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होना।
कठोर शारीरिक गतिविधियों के कारण।
वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® के कारण पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पर दबाव पड़ना।
अगर कà¤à¥€ कमर के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ या फिर पेलà¥à¤µà¤¿à¤• में दरà¥à¤¦ रहा हो।
किस वजह से बढ़ता है योनी का दरà¥à¤¦?
वैसे तो पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन के तेज होने के पीछे कोई à¤à¤• कारण सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ नहीं है, लेकिन वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अधिक चलने या फिर शारीरिक शà¥à¤°à¤® करने पर à¤à¤¸à¤¾ होता है।
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन का पता कैसे लगाया जाà¤, इस बारे में जानने के लिठपढ़ते रहें यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल।
पीजीपी का पता कैसे चलता है?
जब à¤à¥€ आपको पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में कà¥à¤› अजीब-सा लगे या फिर आप असहज महसूस करें, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° जांच करते हà¥à¤ आपसे पूछ सकते हैं कि पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में दरà¥à¤¦ किस जगह से शà¥à¤°à¥‚ हो रहा है और उसकी तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ कितनी है। साथ ही आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° को अपनी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ और शारीरिक गतिविधियों के बारे में à¤à¥€ विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताà¤à¤‚। इसके अलावा, डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपके पोशà¥à¤šà¤°, कमर व कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ की गतिशीलता को नोट करेंगे। डॉकà¥à¤Ÿà¤° इसी के आधार पर तय करेंगे कि आपके शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में दरà¥à¤¦ पीजीपी के कारण हो रहा है या फिर किसी अनà¥à¤¯ कारण से (8)।
इसके अलावा, डॉकà¥à¤Ÿà¤° पोसà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤° पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन पà¥à¤°à¥‹à¤µà¥‹à¤•ेशन टेसà¥à¤Ÿ (P4) और à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ लेगराइज (ASLR) के जरिठà¤à¥€ पीजीपी का पता लगा सकते हैं (9) (10)।
आइà¤, अब पीजीपी के उपचार की बात करते हैं।
पीजीपी का उपचार कैसे होता है?
शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ à¤à¤¾à¤— में होने वाले दरà¥à¤¦ को आसानी से नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है। इसके लिठबस आपको कà¥à¤› जरूरी टिपà¥à¤¸ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने और अपनी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ में जरूरी परिवरà¥à¤¤à¤¨ करने की जरूरत है (7)।
दरà¥à¤¦ को बढ़ाने वाली शारीरिक गतिविधियों को कम कर दें। जिस पोशà¥à¤šà¤° में आपको आराम मिले, उसी में आराम करें।
दरà¥à¤¦ को कम करने के लिठकà¥à¤› वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® किठजाते हैं। इससे आपके पेलà¥à¤µà¤¿à¤• की मांसपेशियां मजबूत होंगी।
आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछें कि चलते समय, खड़े होने की अवसà¥à¤¥à¤¾ और अनà¥à¤¯ शारीरिक गतिविधियां करते समय किस तरह से पेलà¥à¤µà¤¿à¤• को लॉक करना है।
अगर दरà¥à¤¦ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है, तो संà¤à¤µ है कि डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको पेलà¥à¤µà¤¿à¤• को सपोरà¥à¤Ÿ करने के लिठबेलà¥à¤Ÿ दे सकते हैं।
पानी में की जाने वाली कà¥à¤› à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ कर सकते हैं। इससे आपको दरà¥à¤¦ से आराम मिल सकता है। हां, इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जरूर रखें कि टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤° गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को इस तरह के वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® कराने में निपà¥à¤£ हो।
à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚पंकà¥à¤šà¤° की मदद से à¤à¥€ इस दरà¥à¤¦ को कम किया जा सकता है, लेकिन इसे उसी विशेषजà¥à¤ž से करवाà¤à¤‚, जो पीजीपी का इलाज करने में पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हो।
गरà¥à¤® पानी से सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ या फिर गरà¥à¤® व ठंडे पानी की सिकाई à¤à¥€ की जा सकती है।
संà¤à¤µ है कि आपकी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को देखते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° कोई दरà¥à¤¦à¤¨à¤¿à¤µà¤¾à¤°à¤• दवा दे सकता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन से कैसे निपटें?
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान और उसके बाद होने वाले पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन को इन उपायों की मदद से कम किया जा सकता है (11):
जितना हो सके शारीरिक रूप से सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहें और बीच-बीच में आराम à¤à¥€ करते रहें।
उठते-बैठते या फिर चलते-फिरते समय à¤à¤¸à¥€ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ को अपनाà¤à¤‚, जिससे दरà¥à¤¦ कम से कम हो।
हमेशा करवट लेकर लेटें और अपनी टांगों व पेट को तकिये के जरिठसहारा दें।
सीढ़ियां चढ़ते समय पहले उस पैर को रखें जिसमें दरà¥à¤¦ नहीं है।
कोई à¤à¥€ सामान उठाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ न करें, इससे पेलà¥à¤µà¤¿à¤• में दरà¥à¤¦ बढ़ सकता है।
अगर आप शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो इसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में करें।
चलते समय छोटे-छोटे कदम उठाà¤à¤‚।
टांगों को आपस में कà¥à¤°à¥‰à¤¸ करके न बैठें।
हंसते, खांसते व छींकते समय सावधान रहें।
कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ पर बैठते समय पीठके पीछे तकिया या कà¥à¤¶à¤¨ जरूर रखें।
बेड से उतरते समय अपने घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ को à¤à¤• साथ रखें।
बिना हील वाले और आरामदायक चपà¥à¤ªà¤², सैंडल व जूतों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
दरà¥à¤¦ से राहत पाने के लिठकिसी विशेषजà¥à¤ž से मसाज à¤à¥€ ले सकते हैं।
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन के लिठवà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤®
बेशक, कà¥à¤› वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® आपके इस दरà¥à¤¦ को कम कर सकते हैं, लेकिन इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ करने से पहले अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से à¤à¤• बार पूछ जरूर लें। उनके कहने पर ही इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ करें (12)।
बà¥à¤°à¤¿à¤œ à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ : जमीन पर लेट जाà¤à¤‚ और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ को मोड़ लें। फिर सांस छोड़ते हà¥à¤ और पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को सिकोड़ते हà¥à¤ कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ को ऊपर उठाà¤à¤‚। करीब तीन-चार सेकंड तक इसी अवसà¥à¤¥à¤¾ में रहें और वापस सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आ जाà¤à¤‚। इसे आप कई बार कर सकते हैं।
हिप लिफà¥à¤Ÿ : घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के बल आकर आगे à¤à¥à¤•ते हà¥à¤ अपनी हथेलियों को जमीन पर रख दें। फिर à¤à¤• पैर को पीछे की ओर सीधा करते हà¥à¤ ऊपर उठाà¤à¤‚ और वापस नीचे ले आà¤à¤‚। à¤à¤¸à¤¾ ही दूसरे पैर से करें।
लेग पà¥à¤°à¥‡à¤¸ : à¤à¤• तरफ करवट लेकर लेट जाà¤à¤‚ और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ को छाती से लगाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। फिर पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की मांसपेशियों को सिकोड़ते हà¥à¤ पैर को वापस ले आà¤à¤‚। à¤à¤¸à¤¾ ही दूसरी तरफ से à¤à¥€ करें।
लेग लिफà¥à¤Ÿ : à¤à¤• तरफ करवट लेकर लेटें और अपनी टांग को ऊपर उठाà¤à¤‚। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि टांग को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ऊपर तक न ले जाà¤à¤‚। फिर आराम से नीचे ले आà¤à¤‚।
इनके अलावा, आप पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤° à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ जैसे – पेलà¥à¤µà¤¿à¤• टिलà¥à¤Ÿ, कीगल à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ, कैट सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤š और हिप बà¥à¤°à¤¿à¤œ à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ कर सकते हैं। साथ ही सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ बॉल à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ कर सकते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ पीजीपी से पà¥à¤°à¤¸à¤µ पर असर पड़ता है?
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन के चलते नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी के समय टांगों को खोलने में दिकà¥à¤•त हो सकती है। अगर आप à¤à¥€ इस समसà¥à¤¯à¤¾ का सामना कर रही हैं, तो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को बढ़ाने के लिठनिमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के पोजिशन की पà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ करने की सलाह दे सकते हैं :
सीधे या फिर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के बल बैठें।
पीठके बल लेटने से परहेज करें।
अगर अधिक दरà¥à¤¦ के कारण नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ का सहारा ले सकते हैं। यह सबसे अंतिम विकलà¥à¤ª होता है, लेकिन इसके बाद पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन से उबरने में और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय लग सकता है।
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाà¤à¤‚?
अगर पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन में निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित लकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें :
अगर दरà¥à¤¦ के साथ बà¥à¤–ार आठया ठंड लगे।
अगर दरà¥à¤¦ लगातार रहे और आराम करने पर à¤à¥€ न जाà¤à¥¤
पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ होना, जो कम न हो।
अगर यूरिन के समय जलन महसूस हो।
अगर लगातार चकà¥à¤•र आ रहे हों और जी-मिचलाने जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ हो।
अगर अधिक रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ हो या फिर हरे रंग का पानी डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ हो।
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन कितनी जलà¥à¤¦à¥€ ठीक हो जाà¤à¤—ा?
डिलीवरी के बाद कà¥à¤› ही हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ या महीनों में पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन अपने आप ठीक हो जाता है। अगर डिलीवरी के समय सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गंà¤à¥€à¤° रहती है, तो बाद में पेलà¥à¤µà¤¿à¤• पेन से उबरने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकती है (13)।
कà¥à¤¯à¤¾ अगली गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में पीजीपी फिर से हो सकता है?
हां, अगली गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¥€ पीजीपी की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है, लेकिन अगर आप संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ करते हैं और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहते हैं, तो इससे निपटना आसान होता है। साथ ही अगली गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठकà¥à¤› वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ का इंतजार करें और वजन को कम करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। इसके अलावा, पेट और पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की मांसपेशियों को मजबूत करने से à¤à¥€ इस आशंका को कम किया जा सकता है।
कà¥à¤¯à¤¾ पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन और साइटिका समान है?
कई बार पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन और साइटिका में फरà¥à¤• करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये दोनों पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ और कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ के पास होते हैं। साइटिका पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ से शà¥à¤°à¥‚ होकर कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ की तरफ और à¤à¤• या दोनों पैरों में होता है। वहीं, पीजीपी शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के किसी à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ से लेकर योनी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में हो सकता है।
बेशक, पेलà¥à¤µà¤¿à¤• गरà¥à¤¡à¤² पेन किसी à¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को हो सकता है, लेकिन उससे निपटना बेहद आसान है। आप इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में बताठगठटिपà¥à¤¸ और संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार व सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ दिनचरà¥à¤¯à¤¾ की मदद से इस परेशानी का सामना आसानी से कर सकेंगी। इसके अलावा, समय-समय पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° से चेकअप à¤à¥€ करवाते रहें। अगर आपके सरà¥à¤•ल में कोई महिला गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ है, तो इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल को उसके साथ जरूर शेयर करें। आप अपने अनà¥à¤à¤µ हमारे साथ नीचे दिठकमेंट बॉकà¥à¤¸ में साà¤à¤¾ कर सकते हैं।
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